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Digital Detox का बढ़ता ट्रेंड, सोशल मीडिया से दूरी बनाकर सुकून तलाश रहे युवा

मुंबई: सोशल मीडिया और स्मार्टफोन की बढ़ती निर्भरता के बीच अब बड़ी संख्या में युवा डिजिटल डिटॉक्स (digital detox) की ओर रुख कर रहे हैं। यह ट्रेंड खासकर महानगरों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जहां लोग सप्ताह में कुछ घंटे या पूरा दिन मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहने का प्रयास कर रहे हैं।

स्क्रीन टाइम बढ़ा रही परेशानी

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन देखने की आदत तनाव, चिंता और नींद से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकती है। ऐसे में डिजिटल डिटॉक्स लोगों को मानसिक संतुलन बनाए रखने का अवसर देता है।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में कई समूह अब ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। इनमें पुस्तक चर्चा, साइकिलिंग, ट्रैकिंग, योग और सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य लोगों को वास्तविक दुनिया से जोड़ना है।

बचाव के उपायों की तलाश

कॉर्पोरेट सेक्टर में भी इस ट्रेंड का प्रभाव देखने को मिल रहा है। कुछ कंपनियां कर्मचारियों को काम के बाद गैर-जरूरी डिजिटल संचार से बचने की सलाह दे रही हैं। इससे कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी डिजिटल डिटॉक्स से जुड़े हैशटैग तेजी से वायरल हो रहे हैं। हजारों लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और बता रहे हैं कि सीमित स्क्रीन टाइम ने उनकी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। आने वाले समय में डिजिटल डिटॉक्स केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन सकता है।

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