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शेयर बाजार में लगातार दूसरी गिरावट: आखिर कितना बढ़ा खतरा? 

भारतीय शेयर बाज़ार इन दिनों काफी मंदी में चल रहा है और सबसे पहला सवाल जो हर निवेशक के मन में आता है, वो है की आखिर ऐसा हो क्यों रहा? इसके पीछे तेल की बढ़ती कीमत, West Asia में तनाव, global bond yields और रुपये की कमजोरी जैसे कई factors एक साथ काम कर रहे हैं।

21 अगस्त को भारतीय बाजार लगभग flat बंद हुआ जिससे Investors फिलहाल खुलकर risk लेने के बजाय इंतजार कर रहे हैं कि Iran-US tensions कहां जाते हैं, crude oil कितना महंगा होता है और global interest rates का माहौल क्या रहता है। यानी Dalal Street पर इस वक्त सवाल यह नहीं है कि “अगली rally कब आएगी?” बल्कि सवाल है कि “क्या market के सामने मौजूद risks और बढ़ने वाले हैं?” और यही अगले हफ्ते की कहानी का सबसे बड़ा clue भी है।

इस हफ्ते शेयर बाजार की स्थिति

इस पूरे हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में volatility बनी रही। Nifty 50 सिर्फ 0.08% बढ़कर 24,252 पर पहुंचा, जबकि Sensex 77,540.83 पर बंद हुआ। लेकिन पूरे हफ्ते की तस्वीर देखें तो दोनों प्रमुख indices लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए, Nifty करीब 0.5% और Sensex करीब 0.6% नीचे रहा। अब सुनने में 0.5 या 0.6% की गिरावट बहुत बड़ी नहीं लगती। लेकिन असली चिंता यह है कि market के पीछे का sentiment कमजोर हो रहा है।

सोमवार को ही Nifty 50 लगातार पांचवें session में गिरा था उस दिन Nifty 0.32% और Sensex 0.36% नीचे बंद हुआ था। Brent crude करीब $89 प्रति barrel तक पहुंच गया था, जिससे investors की चिंता और बढ़ी इसके बाद गुरुवार को बाजार में अच्छी recovery देखने को मिली। Sensex में 628 points की तेजी आई और Nifty भी मजबूत हुआ। लेकिन शुक्रवार को यह तेजी ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई और market लगभग flat बंद हुआ यानी पूरे सप्ताह की तस्वीर को देखें तो market में buying जरूर हुई, लेकिन conviction के साथ नहीं।

Sector-wise भी कहानी interesting रही 16 major sectors में से 12 sectors पूरे सप्ताह गिरावट में रहे। IT stocks करीब 2.6% नीचे रहे, जबकि private banking stocks ने लगभग 1.3% की मजबूती दिखाई। Small-cap index करीब 1.2% ऊपर रहा, लेकिन mid-cap index लगभग 0.1% गिरा कुछ individual stocks में भी काफी हलचल रही। Tata Motors करीब 5% नीचे रहा, जबकि Welspun Corp में करीब 15.3% की तेजी आई।

Welspun को $1.8 billion का बड़ा order मिलने से stock को मजबूत support मिला इसका मतलब साफ है कि market में हर जगह panic selling नहीं है। Investors अभी भी अच्छे results, strong orders और specific business opportunities वाले stocks में पैसा लगा रहे हैं लेकिन broader market में risk appetite कमजोर है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है global uncertainty।

इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण

अगर इस पूरे market movement को एक chain की तरह समझें तो इसकी शुरुआत होती है West Asia से। Iran और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने crude oil supply को लेकर uncertainty बढ़ा दी है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil routes में से एक है। यहां किसी भी बड़े disruption का सीधा असर global crude prices पर पड़ सकता है और भारत के लिए महंगा crude हमेशा चिंता की बात होता है। क्योंकि भारत अपनी crude oil जरूरत का बड़ा हिस्सा import करता है इसलिए equation बहुत simple है:

Crude Oil महंगा तो Import Bill बढ़ा जिससे Dollar की demand बढ़ी तो Rupee कमजोर और फिर Inflation का खतरा बढ़ा। यही वजह है कि इस हफ्ते crude oil और rupee दोनों market के लिए बड़े indicators रहे 21 अगस्त को रुपया करीब 0.3% की weekly गिरावट के साथ 95.69 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि RBI के intervention ने इसे 96 के psychologically important level से नीचे जाने से रोकने में मदद की।

शेयर बाजार गिरावट: Nifty और Sensex में कमजोरी
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दूसरा बड़ा factor है global bond yields, जब US और दूसरे बड़े markets में bond yields बढ़ती हैं, तो investors को safer assets में ज्यादा attractive returns मिलने लगते हैं। ऐसे में emerging markets से पैसा बाहर जाने या नए investments की रफ्तार कम होने का risk बढ़ता है और इसका असर India जैसे market पर पड़ता है।

तीसरा factor है US inflation और interest-rate uncertainty, जिसका असर खासतौर पर IT stocks पर पड़ा है। Indian IT companies की कमाई का बड़ा हिस्सा US और global clients से आता है अगर अमेरिकी economy में companies technology spending को लेकर cautious होती हैं, तो Indian IT stocks की valuations पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा domestic earnings season का बड़ा हिस्सा अब खत्म हो चुका है इसलिए market को आगे बढ़ाने के लिए fresh positive triggers भी सीमित हैं। Reuters के मुताबिक, analysts को global uncertainties, crude prices और rising yields के बीच Indian equities में near-term caution की उम्मीद है।

अगले हफ्ते शेयर बाजार का विश्लेषण

अब सबसे बड़ा सवाल है, अगले हफ्ते Nifty और Sensex क्या करेंगे? साफ शब्दों में कहें तो अगले हफ्ते market में range-bound और volatile trading की संभावना ज्यादा दिखाई देती है। Analysts भी मान रहे हैं कि West Asia tension और crude prices के कारण Nifty में sideways movement रह सकता है लेकिन यहां तीन बड़े triggers होंगे।

पहला होगा crude oil अगर crude oil फिर तेजी पकड़ता है, तो Indian equities पर pressure बढ़ सकता है लेकिन अगर Hormuz situation में सुधार आता है और oil supply normal होने लगती है, तो market में relief rally देखने को मिल सकती है।

दूसरा है geopolitical tension अगर Iran-US tensions कम होते हैं तो investors का risk appetite वापस आ सकता है लेकिन अगर conflict और बढ़ता है, तो market फिर defensive mode में जा सकता है।

तीसरा, foreign money FII flows भी अगले सप्ताह महत्वपूर्ण रहेंगे। अगर foreign investors Indian equities में buying शुरू करते हैं, तो large-cap stocks और indices को support मिल सकता है। लेकिन अगर global risk के कारण पैसा बाहर जाता है, तो recovery टिकना मुश्किल होगा।

इसलिए अगले सप्ताह investors को सिर्फ Nifty की daily closing नहीं देखनी चाहिए उन्हें Crude, Rupee, FII flows, US bond yields को साथ में देखना चाहिए अगर ये चारों indicators stabilize होते हैं, तो market धीरे-धीरे recovery की तरफ जा सकता है लेकिन अगर crude ऊपर, rupee नीचे और bond yields ऊपर जाते हैं, तो market में फिर selling pressure बन सकता है।

शेयर बाजार गिरावट: Nifty और Sensex में कमजोरी
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भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

शेयर बाजार की गिरावट का सबसे बड़ा असर हमेशा Sensex या Nifty पर नहीं होता असली चिंता तब शुरू होती है जब market में मौजूद risks economy तक पहुंचने लगते हैं। इस समय सबसे बड़ा risk है महंगा crude oil। भारत के लिए oil सिर्फ पेट्रोल-डीजल का मामला नहीं है Crude महंगा होने पर transportation cost बढ़ सकती है। Aviation fuel महंगा हो सकता है। Chemicals, plastics, paints, tyres और कई manufacturing industries के input costs बढ़ सकते हैं। फिर इसका असर धीरे-धीरे consumer prices तक पहुंच सकता है।

यानी महंगा crude तो महंगा transportation, बढ़ती production cost और inflationary pressure। दूसरी तरफ कमजोर रुपया भी imported goods और commodities को महंगा बना सकता है हालांकि भारत की स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं है। देश के foreign exchange reserves 14 अगस्त तक बढ़कर करीब $716.9 billion हो गए थे, जो छह महीने का high है। पिछले सात हफ्तों में reserves में लगभग $50 billion की बढ़ोतरी हुई है इसका मतलब है कि India के पास external shocks से निपटने के लिए एक मजबूत forex cushion मौजूद है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महंगे oil का असर खत्म हो जाएगा।

अगर crude लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है, तो import bill, inflation और currency पर pressure बना रह सकता है और यही RBI के लिए भी चुनौती बन सकता है। एक तरफ growth को support करने के लिए आसान financial conditions चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ oil-driven inflation को control करना भी जरूरी है। यानी crude oil सिर्फ stock market का trigger नहीं है। यह India की monetary policy और economic growth दोनों के लिए महत्वपूर्ण factor बन सकता है।

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