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Zelenskyy की भारत-चीन से अपील, रूस से तेल खरीदना बंद करो

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने एक नई अपील की है, और इस बार निशाने पर सीधे भारत और चीन हैं। Wall Street Journal को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर भारत, चीन और तुर्की रूस के साथ अपना एनर्जी व्यापार रोक दें, तो रूस के लिए यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।

रूस-यूक्रेन जंग को अब काफी वक्त हो चुका है, और इस दौरान पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। पर इसके बावजूद रूस अपनी अर्थव्यवस्था को किसी तरह चलाए रखने में कामयाब रहा है, और इसकी एक बड़ी वजह है भारत, चीन जैसे बड़े देशों के साथ जारी उसका ऊर्जा व्यापार। यही वो पहलू है जिस पर अब Zelenskyy सीधा निशाना साध रहे हैं।

Zelenskyy ने कहा क्या?

Zelenskyy का कहना है कि रूस की अर्थव्यवस्था इस वक्त काफी हद तक भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों के साथ होने वाले व्यापार पर टिकी है। उनके मुताबिक अगर अमेरिका, चीन और भारत मिलकर रूस पर दबाव बनाएं, तो मॉस्को के पास जंग जारी रखने के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं बचेगी। उन्होंने ये भी कहा कि अगर चीन अपनी तरफ से दबाव डाले, जैसा वो पहले भी कुछ हद तक कर चुका है, और साथ में भारत भी साथ दे, तो रूस को रोकने के लिए इतना ही काफी होगा।

आंकड़े क्या कहते हैं

एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में भारत का रूसी तेल आयात पिछले महीने के मुकाबले 16.5 प्रतिशत घटकर करीब 2.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया। इसके बावजूद रूस अब भी भारत को सबसे ज्यादा तेल सप्लाई करने वाला देश बना हुआ है, उसके बाद यूएई और वेनेज़ुएला का नंबर आता है। Kpler के शुरुआती आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट ने ये भी बताया कि सितंबर में ये आयात और घटकर करीब 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक आ सकता है। मतलब आंकड़े दिखाते हैं कि खरीद में धीरे-धीरे कमी तो आ रही है, पर रूस अब भी भारत के लिए एक अहम तेल सप्लायर बना हुआ है।

भारत रूस से तेल क्यों खरीद रहा है

यहां भारत की स्थिति समझना ज़रूरी है। भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद उस वक्त बढ़ाई थी, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की वजह से Strait of Hormuz में रुकावट आ गई थी, जो दुनिया के तेल व्यापार का एक बेहद अहम रास्ता है। ऐसे हालात में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदना जारी रखा, ताकि घरेलू सप्लाई और कीमतों पर असर न पड़े।

Zelenskyy Russia Oil और India China से रूसी तेल खरीद पर अपील
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भारत जैसे देश के लिए ऊर्जा कोई राजनीतिक फैसला भर नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़रूरत है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए पूरा करता है, और अगर सस्ता विकल्प उपलब्ध है, तो उसे नज़रअंदाज़ करना आर्थिक रूप से आसान नहीं होता, खासकर तब जब देश में पहले से महंगाई पर काबू पाने की कोशिश चल रही हो। यही वजह है कि पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत ने अब तक रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद नहीं किया।

युद्ध को लेकर Zelenskyy की और क्या मांगें हैं

इंटरव्यू में Zelenskyy ने ये भी बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से एक “विंटर पैकेज” मांगा है, जिसमें Patriot एयर डिफेंस सिस्टम जैसी अतिरिक्त सैन्य तकनीक शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वॉशिंगटन आगे चलकर रूस के हमलों से यूक्रेन के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को बचाने के लिए भी कोई समझौता करेगा। साथ ही उन्होंने ये भी माना कि जंग खत्म करने की बातचीत आसान नहीं है, क्योंकि उनके मुताबिक पुतिन अभी 

अमेरिका का नया कानून भी सामने आ गया है

इस पूरे मसले में एक और अहम कड़ी जुड़ गई है। कुछ ही दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया कानून साइन किया है, जिसे “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act” नाम दिया गया है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास ये अधिकार आ जाता है कि वो उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें, जो रूसी कच्चे तेल या नैचुरल गैस खरीदते हैं, या प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करते हैं। इस दायरे में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान जैसे देश आ सकते हैं।

हालांकि यहां एक ज़रूरी बात समझनी होगी, ये कानून खुद-ब-खुद किसी एक देश पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं कर देता। ये सिर्फ राष्ट्रपति को वो अधिकार देता है, जिसका इस्तेमाल करना है या नहीं, ये आगे की बातचीत और हालात पर निर्भर करेगा। इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे।

भारत के लिए ये मामला इतना आसान क्यों नहीं

भारत के नज़रिए से देखें तो ये मामला उतना सीधा नहीं है जितना बाहर से लग सकता है। एक तरफ अमेरिका और यूरोप का दबाव है कि रूस से तेल खरीदना बंद किया जाए, दूसरी तरफ भारत की अपनी ऊर्जा ज़रूरतें और आम जनता के लिए किफायती ईंधन सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी भी है। भारत लगातार यही कहता आया है कि उसकी ऊर्जा नीति देश के हित और ग्लोबल मार्केट की परिस्थितियों को देखकर तय होती है, न कि किसी एक पक्ष के दबाव में।

Zelenskyy Russia Oil और India China से रूसी तेल खरीद पर अपील
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आने वाले महीनों में देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका का नया टैरिफ कानून वाकई भारत या चीन जैसे बड़े खरीदारों पर लागू होता है, या ये सिर्फ एक दबाव बनाने का औज़ार बनकर रह जाता है। फिलहाल के लिए इतना साफ है कि रूस-यूक्रेन जंग का असर अब सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज सीधे भारत जैसे देशों की ऊर्जा और व्यापार नीति तक पहुंच रही है।

ये पूरा मसला असल में कई देशों के अलग-अलग हितों के बीच की खींचतान है। यूक्रेन चाहता है कि जंग जल्द खत्म हो, इसके लिए वो रूस की आर्थिक ताकत को कमज़ोर करना चाहता है। अमेरिका और यूरोप अपने सहयोगी के तौर पर उसका साथ दे रहे हैं, पर साथ ही अपने व्यापारिक रिश्तों को भी संभालना चाहते हैं। और भारत जैसे देश अपनी ऊर्जा ज़रूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि इस मसले का कोई एक आसान जवाब नहीं है, बल्कि आने वाले समय में इसमें कई और मोड़ आने की संभावना बनी रहेगी।

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