FSSAI action :- जब आप Amazon, Swiggy Instamart, Flipkart या Zepto से कोई खाने-पीने की चीज़ मंगवाते हैं, तो शायद सोचते भी नहीं कि ये चीज़ असल में सेफ है या नहीं। बड़ा नाम है तो भरोसा तो बनता ही है। पर अगर आपसे कहा जाए कि इन्हीं भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स पर एक ऐसी चीज़ बिक रही थी जो असल में एक ज़हरीला पौधा है, तो शायद अगली बार आप लेबल ज़रूर पढ़ेंगे।
आजकल ज़्यादातर लोग हफ्ते का राशन, फल-सब्ज़ी और यहां तक कि दूध-दही भी इन्हीं ऐप्स से मंगवाते हैं, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि ये बड़े नाम हैं और इन पर भरोसा करना आसान लगता है। पर हाल ही में सामने आई एक कार्रवाई इस भरोसे पर सवाल खड़ा कर रही है।
आखिर क्या है FSSAI Action on Amazon Zepto?
Food Safety and Standards Authority of India, यानी FSSAI ने 23 सितंबर को ऐलान किया कि उसने पांच बड़े e-commerce और quick-commerce प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें Amazon, Swiggy Instamart, BigBasket, Flipkart India और Zepto शामिल हैं। वजह है misbranding यानी गलत लेबलिंग, misleading claims यानी भ्रामक दावे, और सबसे गंभीर बात, ऐसे food articles की बिक्री और डिस्प्ले जो पूरी तरह प्रतिबंधित और ज़हरीले हैं।
पहला मामला, भ्रामक दावों वाला एक प्रोडक्ट
पहला मामला जुड़ा है ‘Happilo Premium Date Bites, Zesty Orange’ नाम के एक प्रोडक्ट से। इस एक प्रोडक्ट को लेकर पांचों प्लेटफॉर्म्स पर, यानी Amazon, Flipkart India, Swiggy Instamart, Zepto और BigBasket, सभी पर भ्रामक दावों का आरोप लगा है। मतलब सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि जिन-जिन जगहों पर ये प्रोडक्ट बिक रहा था, वहां-वहां यही शिकायत सामने आई।
दूसरा मामला, सबसे गंभीर, ज़हरीला धतूरा
अब बात करते हैं उस मामले की जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। FSSAI ने पाया कि Amazon Seller Services, Swiggy Instamart और BigBasket पर धतूरे के फल या बीज बेचे और डिस्प्ले किए जा रहे थे। धतूरा कोई आम खाने-पीने की चीज़ नहीं है, बल्कि एक ज़हरीला पौधा है, जिसकी बिक्री खाद्य पदार्थ के तौर पर पूरी तरह प्रतिबंधित है। मतलब जिन प्लेटफॉर्म्स पर लोग भरोसा करके रोज़मर्रा की ग्रोसरी मंगवाते हैं, वहीं ऐसी चीज़ भी मौजूद रही, जिसे बेचना कानूनन पूरी तरह गलत है।

आम तौर पर धतूरे का इस्तेमाल कुछ पारंपरिक या धार्मिक कामों में होता आया है, पर इसे खाने के लिए इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं। सच कहें तो, ये सुनकर ही थोड़ा डर लगता है कि कोई अनजाने में इसे किसी सामान्य फल-बीज समझकर मंगवा ले। यही वजह है कि इसे food article के तौर पर बेचना कानून के हिसाब से पूरी तरह वर्जित है, चाहे इसे किसी भी नाम या पैकेजिंग में क्यों न पेश किया जाए।
तीसरा मामला, डेयरी प्रोडक्ट्स में गड़बड़ी
तीसरा मामला जुड़ा है डेयरी प्रोडक्ट्स से। Swiggy Instamart और BigBasket पर Milky Mist के तीन प्रोडक्ट्स, Fresh Low Fat Cream, Farm Fresh Curd और Greek Yoghurt को लेकर भ्रामक दावों और गलत प्रोडक्ट जानकारी का मामला सामने आया है। मतलब जो जानकारी पैकेट पर या लिस्टिंग में दी जा रही थी, वो असली प्रोडक्ट से मेल नहीं खा रही थी।
ये अकेली घटना नहीं है
ये पूरी कार्रवाई FSS Act, 2006 और उससे जुड़े FSSAI के नियमों के तहत की जा रही है। और ये सिर्फ एक-दो दिन की बात नहीं है। पिछले छह महीनों से FSSAI लगातार food business operators और e-commerce कंपनियों पर अपनी नज़र सख्त करता जा रहा है, और सोशल मीडिया के ज़रिए समय-समय पर कंज़्यूमर्स को भी आगाह करता रहा है। साफ है कि quick-commerce प्लेटफॉर्म्स और उनके dark stores, यानी वो गोदाम जहां से सीधे डिलीवरी की जाती है, पर regulatory scrutiny अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
असल में क्विक-कॉमर्स का पूरा मॉडल ही तेज़ी पर टिका है। ऑर्डर करते ही 10-15 मिनट में सामान दरवाज़े पर पहुंच जाता है। पर इसी रफ्तार की वजह से कई बार क्वालिटी चेक और सही लेबलिंग जैसी चीज़ें पीछे छूट जाती हैं। जितनी तेज़ी से नए-नए सेलर्स और प्रोडक्ट्स इन प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ते हैं, उतनी ही मुश्किल हो जाती है हर एक चीज़ की बारीकी से जांच करना, और यही वो जगह है जहां FSSAI जैसी एजेंसियों की भूमिका अहम हो जाती है।
कंपनियों ने क्या कहा
दिलचस्प बात ये भी है कि जब इन सभी कंपनियों से सवाल पूछे गए, तो किसी की तरफ से भी तुरंत कोई जवाब नहीं आया। बड़े नाम भरोसा तो बड़ा दिलाते हैं, पर जब सवाल आता है, तो चुप्पी भी उतनी ही बड़ी हो जाती है। ऐसा लगता है जैसे भरोसे की दुकान में भी मिलावट निकल आई हो।
आपको क्या सीखना चाहिए
इस पूरे मामले का असली सबक यही है कि सिर्फ प्लेटफॉर्म का नाम बड़ा देखकर आंखों पर पट्टी बांधकर भरोसा मत कीजिए। प्रोडक्ट की डिटेल्स और लेबल भी ज़रूर चेक कीजिए, चाहे वो कितनी भी बड़ी कंपनी से क्यों न आ रहा हो। खासकर खाने-पीने की चीज़ों के मामले में, जहां सेहत सीधे तौर पर जुड़ी होती है, वहां थोड़ी सी सावधानी बहुत काम आ सकती है।

अगली बार जब भी किसी क्विक-कॉमर्स या e-commerce ऐप से खाने-पीने का कोई सामान मंगवाएं, तो प्रोडक्ट की डिटेल पेज पर दी गई जानकारी को एक बार ज़रूर पढ़ लीजिए, खासकर अगर वो प्रोडक्ट कोई कम जानी-पहचानी चीज़ हो या किसी छोटे ब्रांड का हो। बड़ी कंपनियों की वेबसाइट या ऐप पर लिस्ट होना अपने आप में क्वालिटी की गारंटी नहीं है, क्योंकि जैसा इस मामले ने दिखाया, बड़े प्लेटफॉर्म्स भी इस तरह की चूक से अछूते नहीं हैं।
अगर कभी आपको किसी प्रोडक्ट की जानकारी अधूरी या शक भरी लगे, तो सीधे प्लेटफॉर्म की कस्टमर सपोर्ट टीम से पूछने में झिझकिए मत। और अगर कोई ऐसी चीज़ नज़र आए जो साफ तौर पर खाने की चीज़ न हो, फिर भी food category में लिस्ट हो, तो उसकी शिकायत FSSAI के आधिकारिक माध्यमों पर की जा सकती है। आखिरकार, जागरूक ग्राहक ही इस तरह की गड़बड़ियों को जल्दी पकड़ने में सिस्टम की सबसे बड़ी मदद करते हैं।
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