विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच विदेशों में भारतीयों पर हमलों (Indian Attacks Abroad) के 302 मामले दर्ज हुए। 2025 में 104 मामलों के साथ सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आईं। America, Canada, UAE, Germany, Russia और Ireland समेत कई देशों में मामले दर्ज हुए। सरकार ने सुरक्षा और कांसुलर सहायता को प्राथमिकता बताया।
विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सरकार ने Rajya Sabha में बताया कि 2021 से 2025 के बीच विदेशों में भारतीयों पर हमलों के कुल 302 मामले दर्ज किए गए। आंकड़ों के मुताबिक, हर साल मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली और 2025 में यह संख्या बढ़कर 104 (Indian Attacks Abroad) हो गई, जो पांच साल की अवधि में सबसे अधिक है। देशवार आंकड़ों में America, Canada, UAE, Germany, Russia और Ireland प्रमुख रूप से शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और संबंधित Indian Missions स्थानीय प्रशासन के साथ मामलों को उठाते हैं।
पांच साल में लगातार बढ़े मामले
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2021 में विदेशों में भारतीयों पर हमले के 15 मामले दर्ज (Indian Attacks Abroad) हुए थे। 2022 में यह संख्या बढ़कर 31, 2023 में 67 और 2024 में 85 हो गई। वर्ष 2025 में 104 मामले सामने आए। इस तरह पांच वर्षों में कुल 302 मामले दर्ज किए गए।
आंकड़ों से साफ है कि 2021 से 2025 के बीच दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। 2025 में दर्ज 104 मामले इस पांच साल की अवधि में किसी एक वर्ष में सबसे अधिक हैं।

America, Canada और UAE प्रमुख
देशवार आंकड़ों में America में 33, Canada में 30, UAE में 32, Germany में 19, Russia में 23 और Ireland में 24 हमले दर्ज किए गए हैं।
2025 के आंकड़ों में America में 14 मामले सबसे अधिक बताए गए हैं। इसके बाद UAE में 12, Mali में 11 और Ireland में 10 मामले दर्ज (Indian Attacks Abroad) किए गए। ये आंकड़े अलग-अलग देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की तस्वीर सामने रखते हैं।
मुख्य आंकड़े:
2021: 15 मामले
2022: 31 मामले
2023: 67 मामले
2024: 85 मामले
2025: 104 मामले
कुल: 302 मामले
भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन से संपर्क
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नागरिकों से जुड़े ऐसे मामलों को संबंधित Indian Missions स्थानीय अधिकारियों के सामने उठाते हैं। परिस्थितियों के अनुसार प्रभावित भारतीयों को कांसुलर सहायता और शुरुआती कानूनी मदद भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
MEA की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विदेशों में गिरफ्तार भारतीयों के मामलों में Embassy या Consulate अधिकारी उनकी कुशलक्षेम की जानकारी ले सकते हैं, परिवार को सूचित कर सकते हैं और स्थानीय कानूनों के तहत उपलब्ध कांसुलर सहायता प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, स्थानीय न्यायिक प्रक्रिया में मिशन की भूमिका देश के कानूनों और मामले की परिस्थितियों तक सीमित रहती है।

MADAD और ICWF से मदद
विदेशों में परेशान भारतीय नागरिकों के लिए सरकार ने कई सहायता तंत्र बनाए हैं। MEA का MADAD पोर्टल कांसुलर शिकायतों के ऑनलाइन पंजीकरण, ट्रैकिंग और संबंधित मिशन तक शिकायत पहुंचाने की सुविधा देता है। इसके तहत विदेश में कोर्ट केस, गिरफ्तारी, वेतन बकाया, प्रत्यावर्तन और श्रमिक अधिकारों के उल्लंघन जैसी शिकायतें (Indian Attacks Abroad) भी दर्ज की जा सकती हैं।
इसके अलावा, Indian Community Welfare Fund यानी ICWF जरूरतमंद भारतीय नागरिकों को परिस्थितियों के अनुसार कानूनी सहायता, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, रहने की व्यवस्था और भारत वापसी के लिए सहायता उपलब्ध कराने में मदद करता है। यह सहायता निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर दी जाती है।
MEA विदेश जाने वाले भारतीयों को संबंधित देश के कानूनों, स्थानीय परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी जानकारी से परिचित होने की सलाह भी देता है। रोजगार के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए Pre-Departure Orientation Training कार्यक्रम भी चलाया जाता है, जिसमें अधिकारों, स्थानीय नियमों और उपलब्ध सरकारी सहायता के बारे में जानकारी दी जाती है।
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