जनवरी में सोना करीब पौने दो लाख रुपये (दस ग्राम) का था। कुछ महीने बाद यही सोना पौने डेढ़ लाख पर आ गया। मतलब तीस हजार रुपये का सीधा फर्क। जिसने ऊपर वाले भाव पर खरीदा, उसे थोड़ा दुख हुआ होगा। जिसने इंतजार किया, वो खुश हो गया होगा। और दोनों के दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा होगा आखिर सोना इतनी तेजी से इधर-उधर क्यों भागता है।
बात ये है कि सोने को सिर्फ गहना समझकर देखेंगे तो कभी समझ नहीं आएगा। सोना असल में एक तरह का निवेश भी है, बिल्कुल शेयर या फिक्स डिपॉजिट जैसा। बस इसके पीछे काम करने वाली चीजें थोड़ी अलग हैं।
भारत में सोने का भाव कैसे तय होता है?
पहली बात, भारत सोना बनाता नहीं है, बाहर से खरीदकर लाता है। तो यहां के रेट में तीन चीजें मिली होती हैं बाहर के बाजार में डॉलर के हिसाब से सोने की कीमत, रुपया डॉलर के आगे मजबूत है या कमजोर, और सरकार कितना टैक्स-ड्यूटी लगाती है। इनमें से कोई एक भी चीज हिलती है तो असर सीधे यहां के सोने की दुकान तक पहुंच जाता है।
एक बात और समझिए। मान लो बाहर सोने का भाव जस का तस रहा, कुछ बदला ही नहीं। लेकिन इसी बीच रुपया कमजोर हो गया। तो भी भारत में सोना महंगा हो जाएगा। इसी वजह से टीवी पर बताया गया रेट और आपके इलाके के सुनार की दुकान वाला रेट कई बार मैच नहीं करता, और लोग सोचते रह जाते हैं कि आखिर ऐसा क्यों।
अमेरिका की ब्याज दर से क्या लेना-देना है
अब जरा दूर की बात करते हैं, अमेरिका की। सुनने में अजीब लगेगा पर वहां की ब्याज दरों का असर सीधे यहां तक आता है। अमेरिका का सेंट्रल बैंक जब ब्याज दर बढ़ाता है, तो लोगों के पास एक अच्छा मौका खुल जाता है पैसा बैंक या बॉन्ड में रखो, ब्याज मिलेगा।

सोने की दिक्कत यही है कि यह कोई ब्याज नहीं देता। बस पड़ा रहता है, इस उम्मीद में कि आगे चलकर कीमत बढ़ेगी। तो जब ब्याज देने वाली चीजें फायदे का सौदा लगने लगती हैं, कुछ लोग सोना छोड़कर उधर चले जाते हैं। और जब लगता है कि ब्याज दरें आगे कम होंगी, तो लोग फिर सोने की तरफ लौट आते हैं। यही वजह है कि अमेरिका की हर मीटिंग, महंगाई के आंकड़े और नौकरी की रिपोर्ट का असर सोने पर पड़ता है, भले ही हमें सीधा कनेक्शन समझ न आए।
डॉलर मजबूत हो तो सोना दबाव में क्यों आता है
डॉलर मजबूत या कमजोर होने का सीधा असर भारत में सोने का भाव पर पड़ सकता है। सोने की कीमत हमेशा डॉलर में लिखी जाती है। तो डॉलर मजबूत हो जाए तो बाकी देशों के लिए वही सोना महंगा पड़ने लगता है, और खरीदारी थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन ये कोई पक्का नियम नहीं है। कई बार दुनिया में इतना बड़ा झगड़ा या तनाव हो जाता है कि डॉलर मजबूत होने के बावजूद सोना ऊपर चला जाता है। कई बार बड़े-बड़े देशों के बैंक भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं और पूरा खेल ही पलट देते हैं। तो सिर्फ डॉलर देखकर सोने का अंदाजा लगाना ठीक नहीं है।
दुनिया में डर बढ़े तो सोना क्यों चमकता है
अब बात करते हैं डर की। जब भी दुनिया में कोई जंग छिड़ती है, मंदी का डर बनता है, या शेयर बाजार में हलचल होती है, तो लोग अपना पैसा किसी सुरक्षित जगह रखना चाहते हैं। और सोना इस मामले में सबसे भरोसेमंद माना जाता है, इसे “सेफ हेवन” भी कहते हैं। रूस-यूक्रेन की जंग हो, मिडिल ईस्ट का तनाव हो, या अमेरिका-चीन के बीच की खींचतान ऐसे मौकों पर सोना अक्सर उछला है। पर ये तेजी हमेशा नहीं टिकती। जैसे ही तनाव कम होता है, यह डर वाली खरीदारी भी कम हो जाती है, और सोना फिर नीचे आ सकता है। मतलब सिर्फ आंकड़े ही नहीं, लोगों का मूड भी सोने की कीमत तय करता है।
भारत की अपनी कहानी
भारत में सोना खरीदने का चलन बहुत पुराना है, और यहां ज्यादातर लोग गहनों के लिए सोना खरीदते हैं। शादी का सीजन आए, अक्षय तृतीया या धनतेरस नजदीक हो, तो खरीदारी अपने आप बढ़ जाती है। इस पर सरकार का टैक्स और ड्यूटी जुड़कर रेट को और ऊपर ले जाते हैं। एक बात और ध्यान रखिए — गहना खरीदते वक्त सिर्फ सोने का भाव ही बिल तय नहीं करता, मेकिंग चार्ज और जीएसटी जुड़कर बिल काफी बढ़ जाता है, बहुत बार लोगों को इसका अंदाजा दुकान पर ही होता है।
क्या सोना हमेशा ऊपर ही जाता रहेगा
अब असली सवाल क्या सोना हमेशा बढ़ता ही रहेगा? नहीं, बिल्कुल नहीं। सुरक्षित निवेश मानने का मतलब ये नहीं कि इसमें कभी गिरावट नहीं आएगी। अगर आपने बहुत ऊंचे रेट पर खरीदा है, तो कुछ समय के लिए आपका पैसा नुकसान में भी दिख सकता है। इसलिए “सोना तो कभी नहीं गिरता” सोचकर आंख बंद करके खरीदना ठीक नहीं। इसे अपने पैसे को अलग-अलग जगह बांटने का एक तरीका समझिए। कितना खरीदना है, ये आपकी अपनी आर्थिक स्थिति और कितना रिस्क ले सकते हैं, उस पर निर्भर करता है।
गोल्ड SIP और डिजिटल गोल्ड से जुड़ी एक बात
गूगल पर “सोना क्यों गिर रहा है” लिखते ही ढेर सारे लेख और वीडियो सामने आ जाएंगे। पर एक बात ध्यान रखिए, कई ऐसे पेज किसी न किसी गोल्ड प्रोडक्ट को बेचने का धंधा भी करते हैं। शुरुआत में अच्छी-अच्छी बातें बताएंगे, और आखिर में किसी गोल्ड SIP या डिजिटल गोल्ड स्कीम में पैसा लगाने की सलाह दे देंगे। इसका मतलब ये नहीं कि हर सलाह गलत है, बस ये देख लीजिए कि सलाह देने वाले का कोई फायदा तो नहीं जुड़ा, और स्कीम में छुपी फीस क्या है।

कुल मिलाकर बात इतनी सी है
तो अगली बार जब सोने का रेट अचानक ऊपर-नीचे हो, एक कारण खोजकर मत बैठिए। बाहर के बाजार का रेट, डॉलर-रुपया, अमेरिका की ब्याज दरें और दुनिया में चल रहा तनाव – ये सब मिलकर सोने का भाव तय करते हैं। साथ में भारत का अपना टैक्स और त्योहारी मांग भी जुड़ जाती है। सोने की कीमत कोई मनमाना नंबर नहीं है, इसके पीछे पूरी दुनिया की करेंसी और लोगों का डर-भरोसा काम कर रहा होता है। बस इतना समझ लीजिए कि भाव क्यों बदल रहा है, फिर ये उतार-चढ़ाव डराएगा कम, समझ में ज्यादा आएगा।
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