Meta Report Child Safety India on online child safety and AI content moderation
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Meta की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता: भारत में 6 महीने में बच्चों के शोषण से जुड़े 53 लाख कंटेंट पर कार्रवाई

Meta Report Child Safety India: आज के समय में बच्चों की दुनिया सिर्फ स्कूल, घर और दोस्तों तक सीमित नहीं है। मोबाइल फोन और इंटरनेट ने उनके लिए एक नई दुनिया खोल दी है, जहाँ वे पढ़ाई करने के साथ-साथ मनोरंजन करते हैं और नए लोगों से बातचीत भी करते हैं। लेकिन इसी ऑनलाइन दुनिया में कुछ ऐसे खतरे भी मौजूद हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ करना बच्चों की सुरक्षा के लिए भारी पड़ सकता है।

ज़रा सोचिए, आपका बच्चा जिस ऐप पर वीडियो देख रहा है या किसी से चैट कर रहा है, क्या आपको वास्तव में पता है कि वहाँ उसके सामने क्या आ रहा है? इसी सवाल के बीच Meta की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

भारत में 6 महीने में 53 लाख कंटेंट पर कार्रवाई

Meta ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 2026 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून के बीच भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े करीब 53 लाख कंटेंट पर कार्रवाई की गई। कंपनी के अनुसार, Facebook और Instagram पर भारत में मिले ऐसे 98 प्रतिशत से अधिक कंटेंट का पता यूज़र्स की शिकायत मिलने से पहले ही लगा लिया गया था।

दुनियाभर के आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। Meta के मुताबिक, इसी अवधि में वैश्विक स्तर पर ऐसे करीब 3.32 करोड़ कंटेंट पर कार्रवाई की गई, जिनमें 97 प्रतिशत से अधिक की पहचान पहले ही कर ली गई थी।

हालाँकि, ये आंकड़े कंपनी की ओर से जारी किए गए हैं। इसलिए इन्हें Meta की सुरक्षा व्यवस्था और कार्रवाई के दावों के रूप में समझना चाहिए। इतनी बड़ी संख्या में कंटेंट पर कार्रवाई होना यह भी बताता है कि ऑनलाइन बाल सुरक्षा की चुनौती कितनी व्यापक है। लेकिन क्या इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद बच्चों के लिए इंटरनेट सुरक्षित हो गया है? इसका जवाब है नहीं।

अब अपराधियों ने बदला अपना तरीका

इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अपराधी अब लोगों को फँसाने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं। Meta के मुताबिक, कुछ लोग ऐसे विज्ञापनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पहली नज़र में बिल्कुल सामान्य दिखाई देते हैं, लेकिन उनके जरिए यूज़र्स को प्लेटफॉर्म के बाहर मौजूद गैरकानूनी सामग्री तक पहुँचाने की कोशिश की जाती है।

यानी खतरा हमेशा किसी आपत्तिजनक पोस्ट या संदिग्ध अकाउंट के रूप में सामने नहीं आता। कभी-कभी एक सामान्य दिखने वाला विज्ञापन या लिंक भी किसी बड़ी समस्या की शुरुआत हो सकता है।

Meta Report Child Safety India on online child safety and AI content moderation
Image Source: Google

बच्चों के मामले में यह जोखिम और गंभीर हो जाता है। कम उम्र में उनके लिए किसी की असली पहचान समझना या ऑनलाइन धोखाधड़ी को पहचानना मुश्किल हो सकता है। कोई अनजान व्यक्ति दोस्त बनकर बातचीत शुरू कर सकता है और धीरे-धीरे बच्चे का भरोसा जीतने की कोशिश कर सकता है।

ऐसे में सिर्फ संदिग्ध पोस्ट हटाना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी ज़रूरी है कि यूज़र किसी विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद कहाँ पहुँच रहा है और उसके पीछे किस तरह की गतिविधि हो रही है।

AI की मदद से सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश

Meta का कहना है कि उसने ऐसे विज्ञापनों की पहचान करने के लिए अपनी जाँच का दायरा बढ़ाया है। कार्रवाई केवल उन विज्ञापनों तक सीमित नहीं रखी गई, जिनकी शिकायत पहले से मिल चुकी थी। कंपनी ने संदिग्ध विज्ञापनों से जुड़े अकाउंट बंद करने और बाहरी लिंक ब्लॉक करने जैसे कदम भी उठाए हैं।

इसके अलावा, कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रही है। Meta के मुताबिक, Large Language Model आधारित एक सिस्टम ऐसे विज्ञापनों को पहचानने में मदद करता है, जो देखने में सामान्य लगते हैं, लेकिन यूज़र्स को गैरकानूनी सामग्री की ओर ले जाने का संदेह पैदा करते हैं।

कंपनी अब सिर्फ यह नहीं देखती कि विज्ञापन में क्या दिखाया गया है, बल्कि यह भी जाँचने की कोशिश करती है कि उस पर क्लिक करने के बाद यूज़र कहाँ पहुँचता है।

Meta ने यह भी बताया कि AI की मदद से पहले छूट गई सामग्री की पहचान करने और अपनी सुरक्षा व्यवस्था की कमज़ोरियों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रतिबंधित यूज़र्स के दोबारा नए अकाउंट बनाकर लौटने की कोशिशों को पहचानने पर भी काम किया जा रहा है।

हालाँकि, तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, उसकी अपनी सीमाएँ होती हैं। इसलिए ऑनलाइन बाल सुरक्षा के लिए तकनीकी उपायों के साथ मानवीय निगरानी और जवाबदेही भी ज़रूरी है।

सरकार ने भी लिया मामले पर संज्ञान

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार ने भी कदम उठाए हैं। जुलाई में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Instagram पर ऐसे विज्ञापनों को लेकर Meta को नोटिस जारी किया और उन्हें हटाने का निर्देश दिया। मंत्रालय ने कंपनी के वैश्विक अधिकारियों को भारत बुलाकर इस मुद्दे पर जवाब भी माँगा।

इसके बाद Meta बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C के साइबर अपराध पोर्टल पर साझा करने के लिए राज़ी हो गया।

इस तरह की व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर संबंधित एजेंसियों तक पहुँचना जाँच और कार्रवाई में मदद कर सकता है। लेकिन किसी नोटिस या नई व्यवस्था से समस्या तुरंत खत्म नहीं होगी। इसके लिए लगातार निगरानी, प्रभावी कार्रवाई और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही आवश्यक है।

माता-पिता को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

अब सवाल यह है कि इस पूरी खबर से आम परिवार क्या सीख सकते हैं?

सबसे पहले, बच्चों से उनकी ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में खुलकर बात करना ज़रूरी है। अक्सर माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम पर ध्यान देते हैं, लेकिन वे किन लोगों से बात कर रहे हैं या किस तरह के लिंक और मैसेज देख रहे हैं, इस पर चर्चा नहीं हो पाती।

बच्चों को समझाना चाहिए कि इंटरनेट पर हर व्यक्ति अपनी असली पहचान के साथ मौजूद नहीं होता। किसी अनजान व्यक्ति की बातों पर तुरंत भरोसा करना, निजी जानकारी साझा करना या संदिग्ध लिंक खोलना जोखिम भरा हो सकता है।

इसके साथ ही, बच्चे को यह भरोसा होना चाहिए कि अगर उसे कोई मैसेज, विज्ञापन या बातचीत असहज लगे, तो वह बिना डरे माता-पिता को बता सकता है। अगर बच्चा यह सोचता है कि सच बताने पर उसे डाँट पड़ेगी या उसका फोन छीन लिया जाएगा, तो वह परेशानी छिपा सकता है।

माता-पिता बच्चों की उम्र के अनुसार पैरेंटल कंट्रोल और सुरक्षित अकाउंट सेटिंग्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। लेकिन इन उपायों के साथ बातचीत और भरोसे का रिश्ता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

संदिग्ध गतिविधि दिखे तो क्या करें?

अगर किसी प्लेटफॉर्म पर बच्चों के शोषण से जुड़ी संदिग्ध सामग्री दिखाई दे, तो उसे डाउनलोड करने, आगे भेजने या दोबारा पोस्ट करने से बचें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें और आवश्यकता होने पर साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

भारत में शिकायत के लिए cybercrime.gov.in का इस्तेमाल किया जा सकता है। साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 मुख्य रूप से वित्तीय साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी सहायता के लिए है। बच्चों के ऑनलाइन शोषण जैसे मामलों में साइबर अपराध पोर्टल पर उचित श्रेणी चुनना या पुलिस से संपर्क करना बेहतर होगा। किसी बच्चे को तत्काल सहायता की आवश्यकता होने पर CHILDLINE 1098 से संपर्क किया जा सकता है।

इसका निष्कर्ष

Meta की रिपोर्ट बताती है कि बच्चों के ऑनलाइन शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान और उसे हटाने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। AI और दूसरी तकनीकों की मदद से सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास भी हो रहे हैं। लेकिन अपराधियों के बदलते तरीके यह साफ करते हैं कि केवल तकनीक के भरोसे बच्चों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।

सरकार की निगरानी, सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था अपनी जगह ज़रूरी हैं। इसके साथ माता-पिता की सतर्कता और बच्चों के साथ खुला संवाद भी उतना ही अहम है।

Meta Report Child Safety India on online child safety and AI content moderation
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आज अपने बच्चे से उसकी ऑनलाइन दुनिया के बारे में बात करने के लिए कुछ मिनट निकालिए। हो सकता है कि यह छोटी-सी बातचीत उसे किसी बड़े खतरे से बचाने में मदद कर दे।

आखिरकार, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि वे कौन-सा ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि इस पर भी निर्भर करती है कि परेशानी आने पर वे कितने भरोसे के साथ अपने माता-पिता से बात कर सकते हैं।

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