जरा सोचिए, आखिरी बार आपने ₹10 में कोई ब्रांडेड आइसक्रीम कब खाई थी? शायद याद भी नहीं होगा। पिछले कुछ सालों में आइसक्रीम की कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि एक साधारण कप या कोन के लिए भी 20-30 रुपये चुकाना अब आम बात हो गई है। ऐसे में जब रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने Bombay Creamery नाम से अपना नया आइसक्रीम ब्रांड उतारा और उसकी शुरुआती कीमत सिर्फ ₹10 रखी, तो जाहिर है बाजार में हलचल मचनी ही थी।
पहले समझें, कंपनी लाई क्या है
Bombay Creamery के तहत ग्राहकों को कई फॉर्मेट मिलेंगे कप, कोन और स्टिक आइसक्रीम की शुरुआत ₹10 से हो रही है, जबकि टब और बार जैसे बड़े फॉर्मेट भी बाद में जोड़े जाएंगे। कंपनी का दावा है कि इनमें असली डेयरी क्रीम का इस्तेमाल किया गया है, यानी सिर्फ सस्ता होना ही इसकी पहचान नहीं, बल्कि क्वालिटी पर भी उतना ही जोर दिया गया है। यह पोजिशनिंग बड़ी सोची-समझी लगती है। रिलायंस यह संदेश देना चाहता है कि आइसक्रीम सिर्फ किसी प्रीमियम मौके पर खाई जाने वाली चीज नहीं, बल्कि रोजमर्रा का, हर जेब में फिट होने वाला प्रोडक्ट भी हो सकती है।
अमूल-मदर डेयरी की चिंता
भारत का आइसक्रीम बाजार पहले से ही खासा भरा हुआ है। अमूल, मदर डेयरी, क्वालिटी वॉल्स, वाडीलाल और अरुण जैसे ब्रांड दशकों से अपनी पकड़ जमाए बैठे हैं। इनमें से हर एक का अपना लॉयल कस्टमर बेस है, अपना स्वाद और अपनी पहचान है। लेकिन जिस तरह भारतीय बाजार price-sensitive है यानी यहां का ज्यादातर उपभोक्ता कीमत को लेकर बेहद सजग रहता है उसमें ₹10 की एंट्री प्राइस एक तरह का सीधा हमला है। यह उस ग्राहक को टारगेट कर रही है जो ब्रांडेड आइसक्रीम तो चाहता है, लेकिन ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार नहीं।
यही वजह है कि यह सिर्फ एक नए प्रोडक्ट लॉन्च की खबर नहीं है, बल्कि एक पूरी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी का सिग्नल है, जिससे मौजूदा खिलाड़ियों को अपने दाम और स्ट्रैटेजी पर दोबारा सोचना पड़ सकता है।
रिलायंस का पुराना खेल
अगर आपने रिलायंस के FMCG सफर को गौर से देखा हो, तो एक पैटर्न बार-बार सामने आता है मास मार्केट और आक्रामक कीमत। सॉफ्ट ड्रिंक सेगमेंट में कंपनी ने कैंपा के जरिए एंट्री ली थी, और वहां भी वही रणनीति अपनाई गई बड़े स्थापित ब्रांड्स को कम कीमत के हथियार से चुनौती देना। पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर और बाकी FMCG कैटेगरी में भी कंपनी अपने विशाल रिटेल और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क का पूरा फायदा उठाने की कोशिश में लगी है।

अब वही फॉर्मूला आइसक्रीम पर आजमाया जा रहा है। कम कीमत, बड़ा डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क और रिलायंस का ब्रांड पावर यह तीनों मिलकर ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश है। और यही वह कॉम्बिनेशन है जो पुराने खिलाड़ियों के लिए असली चिंता का सबब बन सकता है।
कम कीमत से जीत?
यहां एक बात साफ समझनी जरूरी है, आइसक्रीम का बिजनेस सिर्फ कीमत पर नहीं चलता। इसमें कई और चीजें उतनी ही अहम होती हैं। कोल्ड-चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए, यानी प्रोडक्ट को खराब हुए बिना दुकान तक पहुंचाने का पूरा तंत्र। रिटेल तक उसकी उपलब्धता होनी चाहिए, ताकि ग्राहक को जब चाहे तब मिल सके। एक मजबूत डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क चाहिए जो छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच बना सके। ब्रांड लॉयल्टी भी उतनी ही जरूरी है, जो सालों में बनती है। और सबसे आखिर में, सबसे जरूरी चीज स्वाद और क्वालिटी, जिसके बिना कोई भी ग्राहक दोबारा उसी दुकान का रुख नहीं करता।
रिलायंस के पास इनमें से एक चीज पहले से मौजूद है और वह है इसका बेहद विशाल रिटेल और डिस्ट्रिब्यूशन इकोसिस्टम। अगर कंपनी Bombay Creamery को बड़े पैमाने पर दुकानों और अपने रिटेल नेटवर्क तक पहुंचा पाती है, तो छोटे शहरों और कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहकों तक पहुंच बनाना उसके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। यही कारण है कि पुराने ब्रांड्स के लिए इस एंट्री को हल्के में लेना समझदारी नहीं होगी।
सिर्फ पश्चिम भारत में टेस्टिंग
एक और बात जो ध्यान देने लायक है। Bombay Creamery को अभी पूरे देश में एक साथ लॉन्च नहीं किया गया है। इसकी शुरुआत सिर्फ पश्चिम भारत के बाजारों से हुई है। इसका मतलब है कि रिलायंस अभी इसे टेस्ट और स्थापित करने के मोड में है। अगर वहां से रिस्पॉन्स अच्छा मिलता है, तभी इसे देश के बाकी हिस्सों में विस्तार दिया जाएगा। यह एक सोची-समझी, कदम-दर-कदम चलने वाली रणनीति है, जो दिखाती है कि कंपनी बिना पूरी तैयारी के इतनी बड़ी छलांग नहीं लगाना चाहती।
असली लड़ाई कीमत की नहीं
यहां जो सबसे दिलचस्प बात है, वह यह कि इस पूरे मुकाबले का फैसला सिर्फ ₹10 की कीमत से नहीं होगा। असली सवाल यह होगा कि कौन बेहतर distribution बना पाता है, कौन छोटे शहरों और कस्बों तक तेजी से पहुंचता है, किसका स्वाद ग्राहकों को ज्यादा पसंद आता है, और सबसे जरूरी कौन लंबे समय तक इतनी कम कीमत बनाए रख पाता है। क्योंकि किसी भी ग्राहक को एक बार दुकान तक खींच लाना अपेक्षाकृत आसान होता है, असली चुनौती यह है कि वह बार-बार वही ब्रांड खरीदे।

तो क्या अमूल-मदर डेयरी को डरना चाहिए?
फिलहाल के लिए इतना कहना जल्दबाजी होगी कि अमूल या मदर डेयरी की बादशाहत को कोई तुरंत खतरा है। इन ब्रांड्स के पास दशकों का भरोसा, गहरी जड़ें जमाया डिस्ट्रिब्यूशन और एक वफादार ग्राहक आधार है, जो रातोंरात नहीं बदलता। लेकिन रिलायंस की एंट्री को नजरअंदाज करना भी समझदारी नहीं होगी। जिस तरह कैंपा ने सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में हलचल मचाई थी, अगर Bombay Creamery भी उसी रफ्तार से आगे बढ़ती है, तो आने वाले महीनों में आइसक्रीम की शेल्फ पर मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है।
फिलहाल के लिए तो यही कहा जा सकता है कि मुकेश अंबानी ने एक और सेगमेंट में कदम रख दिया है, और वो भी ठीक उसी अंदाज में जिसके लिए रिलायंस जाना जाता है कम कीमत, बड़ा नेटवर्क और लंबी रेस की तैयारी। बाकी फैसला तो आने वाले वक्त में ग्राहकों की जुबान और उनकी जेब ही करेगी।
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