सोचिये आप एक बहुप्रसिद्ध कंपनी के मालिक हैं ,और एक सुबह अचानक आपको पता चलता है की आपके सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट्स पर सरकार ने बैन लगा दिया है | और वो बैन भी सिर्फ इसलिए क्योंकि आपने उन डब्बों के लेबल्स पर कुछ ऐसी चीजें लिखी जिसे आप साबित नहीं कर सकते | सुनने में ये सब थोड़ा अजीब लग रहा है न ,पर आज ऐसा ही कुछ हुआ भारत में प्रसिद्धि के शिखर पर अरसे से काबिज एक ब्रांड के साथ |
FSSAI के नए नियमों की कसौटी पर क्यों नहीं टिक पाए Dabur के कुछ दावे?
आपने अपने किचन में बचपन से डाबर के डब्बे जरुर देखें होंगे | एक आम भारतीय के घरों में शायद सबसे आसानी से पाया जाने वाला ब्रांड | शहद से लेकर नारियल पानी तक हर क्षेत्र में डाबर की अपनी अलग पहचान है | पर
आज सुबह से डाबर अचानक से अख़बार की सुर्ख़ियों में छपने लगा है , आज इंस्टाग्राम से लेकर प्रिंट मीडिया तक हर जगह सिर्फ इसी ब्रांड के चर्चे हैं पर इससे पहले की आप सिर्फ़ वजह जानकार अपने घर में मौजूद हर डब्बे की पैकेजिंग को पढ़ने निकल जाएं, आइये जानते हैं क्या है ये पूरा मामला और किन कारणों से अचानक डाबर सबकी नज़र में आ गया है |
FSSAI ने डाबर के कुछ चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर रोक लगाई है क्योंकि वो अपने पैकेजिंग पर किये तमाम दावों की कसौटी पर पूरे खरे नहीं उतर रहे थे | कानून के शब्दों में देखें तो एक ब्रांड किसी भी तरह के भ्रामक दावे करने के लिए स्वतंत्र नहीं होता | पर डाबर अपने पैकेजिंग के प्रति ढीले रवैये को लेकर FSSAI के नजरों में आ गया | उदहारण के लिए आप देखें अगर अपने शहद के पैकेजिंग में 100 प्रतिशत शुद्ध होने की बात लिखी है तो आपके पास वो तमाम कागजात होने चाहिए जो आपके दावों की सच्चाई को प्रमाणित करते हों , और यहाँ सबसे ध्यान देने वाली बात ये है कि आप ऐसी वस्तुओं के प्रामाणिकता को पूरी तरह से कभी भी साबित नहीं कर सकते हैं |

FSSAI का दावा—बिना वैज्ञानिक प्रमाण के ‘100%’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को कर सकते हैं गुमराह।
इस पूरे विवाद को समझने के लिए सिर्फ Dabur का नाम जानना काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि FSSAI आखिर “100%” जैसे शब्दों को लेकर इतनी सख्ती क्यों दिखा रहा है। दरअसल, भारत में खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावों को Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 नियंत्रित करते हैं। इन नियमों का उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कंपनी ऐसा दावा न करे जो उपभोक्ता को भ्रमित करे। FSSAI का कहना है कि “100% Pure”, “100% Natural” या “100% Organic” जैसे दावे अपने आप में Absolute Claims हैं। यानी ऐसे दावे यह संदेश देते हैं कि उत्पाद में किसी भी प्रकार की अशुद्धि, प्रोसेसिंग या संदेह की बिल्कुल भी गुंजाइश नहीं है। लेकिन वैज्ञानिक रूप से ऐसे दावों को हर परिस्थिति में साबित करना लगभग असंभव माना जाता है। इसलिए नियामक ने इन्हें “ambiguous, unverifiable and likely to mislead consumers” यानी अस्पष्ट, सत्यापित न किए जा सकने वाले और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावे बताया है।
यही कारण है कि FSSAI ने Dabur को केवल कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का आदेश नहीं दिया, बल्कि कंपनी को 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) जमा करने का भी निर्देश दिया है। यानी कंपनी को यह बताना होगा कि उसने इन विवादित दावों को हटाने या संशोधित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन उत्पादों पर कार्रवाई हुई है उनमें Organic Honey, Himalayan Organic Apple Cider Vinegar, Virgin Coconut Oil, Cow Ghee, Sesame Oil, Coconut Water और Coconut Milk जैसे लोकप्रिय उत्पाद शामिल हैं। ये सभी Dabur के ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जिनकी बाजार में मजबूत हिस्सेदारी मानी जाती है।
ऐसा नहीं है कि डाबर पर अचानक ये बैन का पहाड़ टूट पड़ा है| दरअसल FSSAI की माने तो उन्होंने पहले भी डाबर से इस विषय पर जवाब तालाब किया था पर कंपनी की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं मिला और इन्हीं कारणों से आज डाबर FSSAI के चंगुल में फंसा छटपटा रहा है | गौरतलब है की जिन प्रोडक्ट्स पर बैन लगा है वो तमाम प्रोडक्ट्स मार्केट में बहुत ही तगड़ा प्रभाव रखते हैं| दिलचस्प बात यह भी है कि यह विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ। पिछले दो वर्षों से FSSAI लगातार “100%” जैसे दावों के खिलाफ सख्त रुख अपनाता रहा है। इससे पहले भी Dabur के Real Fruit Juice पर लिखे “100% Fruit Juice” दावे को लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। उस समय भी FSSAI ने अदालत में कहा था कि Food Safety कानून और Advertising & Claims Regulations, 2018 में “100%” जैसा दावा मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए ऐसे लेबल उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं। यानी आज जो कार्रवाई देखने को मिल रही है, वह किसी एक दिन में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रही नियामकीय प्रक्रिया का परिणाम है।
अब ऊपर लिखी तमाम बातों को पढ़कर आप सोच रहे होंगे की क्या इतने सालों से आप कुछ गलत चीजों का इस्तेमाल कर रहे थे | पर हम यहाँ साफ़ कर दें कि अगर आप ऐसा सोच रहें है तो आप गलत हैं | जी हाँ, आप गलत हैं क्योंकि FSSAI ने कहीं भी ये नहीं कहा की डाबर मिलावटी चीजें बेच रहा था उन्होंने बस उनके कुछ बेबुनियाद दिखने वाले दावों पर शिकंजा कस दिया है | आसान तरीके से समझें तो डब्बे के अंदर की चीजों का इस खबर से इस बैन से कोई लेना देना है ही नहीं | डाबर बस इस जाल में इसीलिए फँस गया है क्योंकि उसने अपने पैकेजिंग में शत प्रतिशत नेचुरल , आर्गेनिक होने के दावे बिना विशेषज्ञों द्वारा सत्यापित किये सर्टिफिकेट्स के बिना किये|

क्या अब बाजार से गायब हो जाएंगे Dabur के प्रोडक्ट्स? जानिए सच और अफवाह में फर्क।
अब अगर आपको ये लगता है की इस बैन के लगने से आज से डाबर की चीजें आपको आपके घर के निचे खुले दुकानों में या माल्स में नहीं मिलने लगेंगी तो आप गलत हैं | ये बैन सिर्फ डाबर के कुछ चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर है पूरी कंपनी पर नहीं | और ये बैन भी कोई पत्थर से खींची लकीर नहीं है जिसे किसी तरीके से मिटाया ही नहीं जा सकता | अब आइये उस तरीके पर भी एक नजर डालते हैं जो डाबर को इन तमाम परेशानियों से निकाल सकती हैं | देखिए अगर डाबर ने अपनी पैकेजिंग से वो सरे भ्रामक दावों को मिटा दिया तो फिर से आपको बाजार में उसके प्रोडक्ट्स की वही धूम देखने को मिल सकती है |