मामला क्या है ?
याद कीजिए साल था और घटना थी पुलवामा की, जी हां! पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान(India Pakistan Trade) के खिलाफ सिर्फ कूटनीतिक कदम ही नहीं उठाए, बल्कि व्यापार के मोर्चे पर भी बड़ा फैसला लिया। पाकिस्तान से आने वाले सामान पर पहले भारी शुल्क लगाया गया और फिर पाकिस्तान-उत्पत्ति वाले सामान के आयात पर प्रभावी रोक लगा दी गई।
देश को लगा कि अब पाकिस्तान का सामान भारत नहीं आ सकता लेकिन कल्पना कीजिए कि सात साल बाद अचानक खबर आती है कि पाकिस्तान की 364 टन सूखी खजूर भारत के बंदरगाह तक पहुंच गई। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि खजूर आई, सबसे बड़ा सवाल है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसा व्यापार प्रतिबंध लागू है, तो यह माल भारत तक पहुंचा कैसे?
क्या सीमा पार से कोई नया रास्ता खुल गया, क्या नियम बदल गए या फिर किसी ने पूरे सिस्टम को ही चकमा देने की कोशिश की? इन्ही सवालों से शुरू होती है इस पूरी कहानी की सबसे दिलचस्प परत। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस यानी DRI ने गुजरात के कांडला पोर्ट पर एक नहीं, दो नहीं बल्कि 13 कंटेनरों को रोक लिया इन कंटेनरों में करीब 364 मीट्रिक टन सूखी खजूर थी, जिसकी कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

क्या है खजूर का पाकिस्तान कनेक्शन
हमारे अधिकारियों का ध्यान खजूर पर नहीं गया, उनका ध्यान गया उन कागजों पर जिनमे लिखा था कि यह माल UAE का है। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो अधिकारियों का दावा है कि कहानी कुछ और थी उनके मुताबिक यह खजूर असल में पाकिस्तान में उगाई गई थी। यानी अगर जांच सही साबित होती है, तो सवाल सिर्फ एक कंटेनर का नहीं रह जाता, सवाल यह बन जाता है कि क्या भारत के व्यापार प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए किसी ने तीसरे देश का इस्तेमाल किया? जांच एजेंसियों के अनुसार कथित तौर पर यही हुआ, माल पहले पाकिस्तान से निकला फिर UAE पहुंचा और उसके बाद दस्तावेजों में UAE को मूल देश बताकर भारत भेजने की कोशिश की गई।
अगर यह आरोप अदालत या जांच में साबित होता है, तो इसका मतलब सिर्फ गलत दस्तावेज नहीं होगा बल्कि भारत की व्यापार नीति को चकमा देने की कोशिश भी माना जा सकता है। लेकिन यहां रुककर एक बात समझना बहुत जरूरी है इस समय यह जांच एजेंसियों का आरोप है। अभी किसी अदालत ने यह तय नहीं किया है कि सभी आरोप साबित हो चुके हैं, और न ही यह कहा गया है कि इसमें पाकिस्तान या UAE की सरकार शामिल थी|
जांच का फोकस कथित तौर पर माल की उत्पत्ति और उसे गलत तरीके से घोषित करने पर है। लेकिन अब सोचिए अगर यह खेप पकड़ में नहीं आती तो क्या होता? 364 टन खजूर आराम से भारतीय बाजार में पहुंच जाती। कोई ग्राहक कभी यह नहीं जान पाता कि यह माल कहां से आय और शायद किसी को शक भी नहीं होता कि कागजों में लिखी हुई “Country of Origin” और असली Country of Origin अलग हो सकती है।
कार्रवाई:
यही वजह है कि DRI जैसी एजेंसियां सिर्फ सामान नहीं पकड़तीं वे पूरी सप्लाई चेन की जांच करती हैं क्योंकि अगर एक बार ऐसा रास्ता सफल हो जाए तो कल इसी मॉडल से कोई और प्रतिबंधित सामान भी भारत पहुंच सकता है। यहाँ दिलचस्प बात यह है कि यह पहला मामला भी नहीं है कुछ समय पहले DRI ने एक और कार्रवाई में Pok वाले गुग्गुल रेजिन की खेप भी पकड़ी थी| जिसे कथित तौर पर किसी दूसरे देश का बताकर भारत लाया जा रहा था, यानी जांच एजेंसियों को शक है कि यह कोई अकेली घटना नहीं हो सकती।
अब यहां एक बड़ा सवाल उठता है कि आखिर कोई ऐसा करेगा क्यों? इसका जवाब भी सीधा है जब किसी देश के सामान पर प्रतिबंध लग जाता है, तो उसकी सीधी बिक्री तो बंद हो जाती है, लेकिन अगर वही सामान किसी तीसरे देश के नाम से बेच दिया जाए तो बाजार भी मिल जाता है और प्रतिबंध से बचने की कोशिश भी हो सकती है।
इसी वजह से दुनिया भर में Country of Origin को लेकर नियम बेहद सख्त बनाए गए हैं, क्योंकि कई बार असली कीमत सामान की नहीं होती उसके पीछे छिपे देश की होती है। भारत के लिए यह मामला सिर्फ 3 करोड़ रुपये की खजूर का नहीं है, ये इस बात का संकेत है कि अगर कोई व्यापार प्रतिबंध लागू किया गया है तो उसे लागू कराने के लिए सिर्फ सीमा पर सैनिक ही नहीं बल्कि कस्टम्स, DRI और इंटेलिजेंस एजेंसियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Ramayana का ट्रेलर तो 30 जुलाई को आया, असली कहानी शेयर बाज़ार में लिखी जा रही थी

अब इस मामले में आगे क्या होगा?
तो आगे इस मामले में जांच जारी रहेगी, ये पता लगाया जाएगा कि कथित तौर पर दस्तावेज किसने तैयार किए, माल किसने भेजा और क्या वास्तव में इसकी उत्पत्ति पाकिस्तान थी। अब आपके मन में ये सवाल भी आ रहे होंगे की अगर इस माल के रिश्ते पाकिस्तान से है ये साबित हो गया तो क्या होगा, अगर आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित आयातकों और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कस्टम्स और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। लेकिन एक बात साफ है भारत-पाकिस्तान की कहानी अब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं है, यह व्यापार, सप्लाई चेन और वैश्विक लॉजिस्टिक्स तक पहुंच चुकी है।
और इस बार युद्ध की खबर नहीं 364 टन खजूर ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर फिर एक नया सवाल खड़ा कर दिया है।