जिस Paytm को कुछ समय पहले बाज़ार लगभग खत्म मान बैठा था, जिस कंपनी के शेयर से निवेशकों का भरोसा बुरी तरह टूट गया था, उसी में एक निवेशक का करीब ₹360 करोड़ का दांव अब सवा हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा की वैल्यू का हो चुका है, नाम है (Akash Bhansal) आकाश भंसाली।
लेकिन असली कहानी सिर्फ मुनाफे की नहीं है। असली कहानी यह है कि जब बाज़ार Paytm से डरकर भाग रहा था, तब भंसाली ने इसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।
शुरुआत कैसे हुई
Paytm की पैरेंट कंपनी One 97 Communications का शेयर 2024 की शुरुआत में भारी दबाव में आ गया था। Reserve Bank of India ने Paytm Payments Bank के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई की थी, और इसके बाद बाज़ार में कंपनी के पूरे बिज़नेस मॉडल को लेकर सवाल खड़े हो गए।
शेयर लगातार गिरता रहा, एक समय स्टॉक करीब ₹310 के 52-हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंच गया। उस दौर में Paytm का नाम ही निवेशकों के लिए अनिश्चितता का दूसरा नाम बन चुका था। इसी डर के बीच आकाश भंसाली(Akash Bhansal) ने अपना दांव लगाया। जून 2024 की तिमाही में उनकी हिस्सेदारी One97 Communications में बढ़कर करीब 1.21 प्रतिशत हो गई|
यह आंकड़ा BSE की शेयरहोल्डिंग डेटा से पुष्टि होता है। उस वक्त शेयर करीब ₹465 के आसपास ट्रेड कर रहा था, तो यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने पूरा निवेश ₹310 के निचले स्तर पर ही किया। उनकी पोज़िशन की शुरुआती वैल्यू करीब ₹360 करोड़ के आसपास बैठती है, बाद में हिस्सेदारी और बढ़ी, मार्च 2025 तक उनके पास करीब 79.21 लाख शेयर, यानी 1.24 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, यह आंकड़ा कंपनी की सालाना रिपोर्ट में भी दर्ज है।
Akash Bhansali Paytm में क्यों किया निवेश?
भंसाली के दांव के साथ-साथ Paytm खुद भी बदल रही थी, कंपनी को अपने ऑपरेशंस को नए रेगुलेटरी माहौल के हिसाब से ढालना था, और धीरे-धीरे फोकस उन हिस्सों पर बढ़ा | जहां सीधा रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी बन सकती थी, खासकर मर्चेंट इकोसिस्टम पर, सिर्फ कंज़्यूमर पेमेंट्स के मुकाबले मर्चेंट बिज़नेस में मोनेटाइज़ेशन की गुंजाइश कहीं ज़्यादा है| और कई एनालिस्ट इसे ही Paytm की प्रॉफिटेबिलिटी की असली चाबी मानते रहे हैं। 2026 की शुरुआत में Bernstein ने भी यही बात कही थी कि मर्चेंट पेमेंट्स पर फोकस कंपनी को मुनाफे की तरफ ज़्यादा साफ रास्ता दे सकता है।
FY24 में Paytm ने ₹9,978 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया था, ESOP से पहले EBITDA के स्तर पर ₹559 करोड़ की प्रॉफिटेबिलिटी दिखी थी| हालांकि पूरे साल का नेट लॉस ₹1,423 करोड़ रहा, तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं थी, लेकिन ऑपरेटिंग बिज़नेस में सुधार के संकेत दिखने लगे थे।

आज का ट्रिगर
आज, 10 अगस्त 2026 को, Paytm के शेयर में ज़बरदस्त उछाल आया। शुक्रवार के ₹1,441 के बंद भाव से शेयर सोमवार को 8 से 10 प्रतिशत तक चढ़ा| और दिन के दौरान अलग-अलग समय पर ₹1,565 से लेकर करीब ₹1,599 तक के नए 52-हफ्ते के हाई तक पहुंचा, इस रैली में कंपनी का मार्केट कैप ₹1 लाख करोड़ के पार निकल गया। तात्कालिक वजह थी Bernstein का टारगेट प्राइस ₹1,500 से बढ़ाकर ₹2,200 करना, Outperform रेटिंग बरकरार रखते हुए।
खास बात यह है कि यह पहली बार है जब Bernstein का टारगेट Paytm की IPO प्राइस, यानी ₹2,150, से ऊपर गया है, और मौजूदा स्तरों से यह करीब 52 प्रतिशत की संभावित बढ़त दिखाता है, लेकिन सिर्फ टारगेट बढ़ना ही पूरी कहानी नहीं है।
असली वजह इससे थोड़ी गहरी है, बाज़ार को उम्मीद बंधी है कि Paytm आने वाले समय में कुछ चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शंस से भी कमाई शुरू कर सकती है। इतने बड़े पेमेंट वॉल्यूम पर सिर्फ 3 से 4 बेसिस पॉइंट का मार्जिन भी FY30 तक कंपनी के EBITDA में करीब ₹2,200 करोड़ जोड़ सकता है| यही गणित असली उत्साह की जड़ में है। भंसाली के पास करीब 79.21 लाख शेयर हैं। अगर आज के हाई, यानी करीब ₹1,565 से ₹1,600 के बीच के भाव को आधार मानें, तो उनकी होल्डिंग की मार्केट वैल्यू करीब ₹1,240 करोड़ से ₹1,267 करोड़ के बीच बैठती है।
जिस पोज़िशन की शुरुआती वैल्यू करीब ₹360 करोड़ थी, वह अब तीन गुना से भी ज़्यादा हो चुकी है, यानी करीब ₹865 करोड़ या उससे कुछ ज़्यादा की वेल्थ क्रिएशन। एक बात साफ रहनी चाहिए, जब तक शेयर बेचे नहीं जाते, यह realised profit नहीं, बल्कि paper profit है।
भंसाली ने ऐसा क्या देखा
सवाल लाज़मी है, उस वक्त बाकी बाज़ार जो नहीं देख पा रहा था, भंसाली ने क्या देखा। शायद उन्होंने Paytm को सिर्फ उस समय की रेगुलेटरी समस्या के आधार पर नहीं आंका। सवाल यह था कि अगर रेगुलेटरी झटके को कंपनी के कोर बिज़नेस से अलग करके देखा जाए, तो क्या Paytm के पास एक मज़बूत पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज़ प्लेटफॉर्म बनने की क्षमता बचती है। एक सामान्य निवेशक और कॉन्ट्रेरियन निवेशक के बीच यही फर्क दिखता है, जब बाज़ार किसी कंपनी को सिर्फ उसकी मौजूदा समस्या के आधार पर प्राइस कर रहा हो, तब कुछ बड़े निवेशक भविष्य की कमाई की संभावना को देखने की कोशिश करते हैं।
लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि Paytm का रिस्क खत्म हो गया है, किसी बड़े निवेशक की खरीदारी देखकर उसी स्टॉक में कूद पड़ना कोई रणनीति नहीं है, बड़े निवेशकों के पास अलग कैपिटल बेस, अलग रिस्क एपेटाइट और बिज़नेस को परखने के लिए अलग संसाधन होते हैं। जिस भाव पर भंसाली ने पोज़िशन बनाई थी और आज का भाव, दोनों में बड़ा फर्क है, तो आज खरीदने वाले का रिस्क प्रोफाइल बिल्कुल अलग हो सकता है।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
Payments बिज़नेस में कॉम्पिटीशन बेहद तगड़ा है, PhonePe और Google Pay UPI इकोसिस्टम में पहले से मज़बूत पोज़िशन में हैं। रेगुलेटरी माहौल भी fintech कंपनियों के लिए लगातार अहम बना हुआ है| अप्रैल 2026 में RBI ने Paytm Payments Bank का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। कंपनी का कहना रहा कि इसका उसके कोर पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज़ बिज़नेस पर बड़ा असर नहीं है, फिर भी यह घटना दिखाती है कि fintech जैसे सेक्टर में रेगुलेटरी रिस्क को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
दूसरी तरफ कुछ पॉज़िटिव संकेत भी हैं। सरकार की UPI इंसेंटिव पॉलिसी और बजट 2026 में इसके लिए रखे गए करीब ₹2,000 करोड़ के प्रावधान को Bernstein डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम के लिए अच्छा संकेत मान चुका है, यानी बाज़ार अब सिर्फ यह नहीं देख रहा कि कंपनी कितने ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस करती है, बल्कि यह देख रहा है कि इस इकोसिस्टम से मोनेटाइज़ेशन कितना बेहतर हो सकता है।आकाश भंसाली की कहानी को सिर्फ “₹360 करोड़ से ₹1,200 करोड़ से ज़्यादा” की हेडलाइन तक सीमित करना ठीक नहीं होगा, असली कहानी उस दौर की है जब RBI की कार्रवाई, शेयर में भारी गिरावट और बिज़नेस मॉडल को लेकर अनिश्चितता, तीनों एक साथ थे, और भंसाली ने ठीक उसी वक्त पोज़िशन बनाई।

असली सबक
इस पूरे किस्से का सबसे बड़ा सबक शायद Paytm नहीं, बल्कि price और business के फर्क को समझना है। किसी शेयर का गिरना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कंपनी खराब है, और तेज़ी से बढ़ना यह साबित नहीं करता कि अब कोई रिस्क नहीं बचा।
असली सवाल हमेशा यही रहना चाहिए, बिज़नेस की अंदरूनी इकोनॉमिक्स क्या है, समस्या अस्थायी है या स्थायी, मैनेजमेंट उसे सुलझा सकता है या नहीं, और मौजूदा वैल्यूएशन भविष्य की ग्रोथ को कितना पहले से भुना चुकी है। Paytm ने अपनी कहानी अभी खत्म नहीं की है|
शायद अगला अध्याय अभी शुरू हो रहा है। अगर कंपनी पेमेंट्स और मर्चेंट बिज़नेस को टिकाऊ तरीके से मोनेटाइज़ करती रहती है, तो ₹2,200 का Bernstein टारगेट एक माइलस्टोन बन सकता है। अगर कमाई की उम्मीदें पूरी नहीं होतीं या कॉम्पिटीशन और रेगुलेशन का दबाव बढ़ता है, तो वही स्टॉक फिर उतार-चढ़ाव दिखा सकता है। तो आकाश भंसाली के ₹865 करोड़ के मुनाफे को देखकर सवाल यह नहीं होना चाहिए कि उन्होंने Paytm खरीदा तो क्या हमें भी खरीदना चाहिए। सवाल यह होना चाहिए, उन्होंने उस वक्त ऐसा क्या देखा जो बाकी बाज़ार नहीं देख पाया। स्टॉक मार्केट में असली हुनर सिर्फ सही स्टॉक चुनना नहीं, सही समय पर सही रिस्क को पहचानना है।