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सरकार ने Toll वसूली में कर दिया बड़ा खेल! अब किससे कितना पैसा लिया जाएगा?

Digital Local Pass ने देश के Toll System में एक बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। – सुबह के पौने नौ बजे हैं, Delhi की एक कॉलोनी से एक बाइक निकलती है। हेलमेट, टिफ़िन, थोड़ी जल्दी। ऑफ़िस बस दो किलोमीटर दूर है। रास्ते में एक गेट पड़ता है, वही जो हर रोज़ पड़ता है, वही जो पिछले पाँच साल से पड़ रहा है। FASTag की बीप बजती है। पैसे कटते हैं। ठीक उतने ही, जितने कोई ट्रक ड्राइवर उस दिन देता है, जो पाँच सौ किलोमीटर का सफ़र तय कर रहा होता है। दो किलोमीटर का सफ़र। पाँच सौ किलोमीटर का सफ़र, दोनों की कीमत बराबर।

ये कहानी उस टोल की नहीं है। ये कहानी उस सिस्टम की है, जो इस गड़बड़ी को ठीक करने के लिए बना था, मगर ख़ुद इतना उलझा हुआ था कि ज़्यादातर लोगों तक पहुँचा ही नहीं। और अब, अगस्त 2026 में, सरकार ने इसी सिस्टम को पूरी तरह पलट दिया है। सवाल ये नहीं कि बदलाव क्या है। सवाल ये है, इसे बनने में पाँच साल क्यों लगे, और इसका फ़ायदा आपको मिलेगा या नहीं।

कहानी शुरू होती है फ़रवरी 2021 से, जब सरकार ने देश के हर Toll Plaza पर FASTag अनिवार्य कर दिया। मक़सद साफ़ था, कैश की लाइन ख़त्म करो, गाड़ियाँ बिना रुके निकलें। एक रिसर्च के मुताबिक़, Toll पर फंसे रहने से देश को सालाना क़रीब 6.6 अरब डॉलर का नुकसान होता था FASTag ने बड़ी हद तक ये लाइन ख़त्म भी कर दी। मगर एक दिक़्क़त अनसुनी रह गई। हर Toll Plaza के आसपास कुछ लोग ऐसे भी रहते हैं, जिनके लिए वो गेट रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक अड़ंगा बन जाता है।

दफ़्तर जाना हो, बच्चों को स्कूल छोड़ना हो, बस सब्ज़ी लेने जाना हो, हर बार वही गेट, वही टोल। इसीलिए टोल प्लाज़ा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वालों के लिए एक ‘Local Pass’ पहले से मौजूद था। सस्ता, महीने भर के लिए, असीमित आना-जाना। मगर इसे बनवाने का तरीक़ा, ख़ुद एक Toll जितना थकाऊ था। Toll Plaza के दफ़्तर जाओ, पते का सबूत दिखाओ, गाड़ी के काग़ज़ात जमा करो, और इंतज़ार करो। जितने लोग इसके हक़दार थे, उतने लोगों तक ये सुविधा कभी पहुँची ही नहीं।

Toll से Local Pass तक: पाँच साल में क्या बदला?

यहीं से कहानी मुड़ती है। जुलाई 2026 में, Delhi के Mundka-Bakkarwala टोल प्लाज़ा पर, NHAI ने एक प्रयोग शुरू किया, नाम रखा गया The Digital Local Pass आइडिया सीधा था, अगर DigiLocker और VAHAN जैसे सरकारी प्लेटफ़ॉर्म पहले से आपका पता, आपकी गाड़ी की जानकारी संभाले बैठे हैं, तो टोल प्लाज़ा पर वही काग़ज़ात दोबारा जमा करने की ज़रूरत ही क्या है। तो अब क्या होता है? आप Rajmarg Yatra ऐप खोलते हैं, अपनी सहमति देते हैं।

ऐप DigiLocker से आपका पता खींचता है, VAHAN से आपकी गाड़ी की डीटेल। फिर GIS यानी लोकेशन-मैपिंग तकनीक से जांच होती है कि क्या आपका घर सच में उस टोल प्लाज़ा के 20 किलोमीटर के दायरे में आता है। कुछ ही मिनट में, पास आपके FASTag से जुड़ जाता है। ना कोई फ़ॉर्म, ना दफ़्तर का चक्कर। यही ऐप अब शिकायतें भी सुनता है, वो भी 22 भाषाओं में।

Digital Local Pass NHAI Toll Plaza
Image Source: Goolge

और ये सिर्फ़ एक Toll Plaza पर नहीं रुका। पिछले हफ़्ते, यानी 18 अगस्त को, NHAI ने इस सुविधा को 121 टोल प्लाज़ों तक फैला दिया। मतलब, देश के अलग-अलग कोनों में लाखों लोग, जो पहले इस पास के बारे में जानते तक नहीं थे, अब सिर्फ़ अपने फ़ोन से इसे ले सकते हैं। मगर यहाँ एक दिलचस्प बात है।

ठीक एक साल पहले, 15 अगस्त 2025 को, इसी सरकार ने एक और टोल सुधार लॉन्च किया था, FASTag Annual Pass क़रीब तीन हज़ार रुपये में, पूरे साल या दो सौ ट्रिप तक, देश के किसी भी हाईवे पर बिना टोल के सफ़र। वो लॉन्च झंडे-बैंड के साथ हुआ, ख़ुद Nitin Gadkari ने ट्वीट करके एलान किया, और अब तक अस्सी लाख से ज़्यादा लोग वो पास ख़रीद चुके हैं।

Digital Local Pass: सुविधा या अभी अधूरा सुधार?

Local Pass की कहानी बिल्कुल अलग है। कोई बड़ा ऐलान नहीं, कोई ट्वीट-तूफ़ान नहीं। वजह समझिए, Annual Pass उस तबके के लिए है जो लंबी दूरी तय करता है, जो सोशल मीडिया पर मुखर है। Local Pass उस तबके के लिए है जो टोल प्लाज़ा के ठीक बगल में रहता है, अक्सर छोटे शहरों और क़स्बों में, जिसकी आवाज़ उतनी दूर तक नहीं पहुँचती और एक बात और, देश में क़रीब साढ़े ग्यारह सौ टोल प्लाज़ा हैं।

अभी Digital Local Pass 121 पर उपलब्ध है, यानी हर दस में से करीब एक पर। बाक़ी हज़ार से ज़्यादा Toll Plaza के आसपास रहने वाले लोग, अभी भी वही पुराना थका देने वाला तरीक़ा झेल रहे हैं। सरकार कहती है, बाक़ी प्लाज़ा आने वाले महीनों में जुड़ेंगे। मगर ‘आने वाले महीने’ कब ख़त्म होंगे, ये अभी साफ़ नहीं।

Digital Local Pass NHAI Toll Plaza
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ज़रा ज़ूम आउट करके देखिए, तो ये कहानी सिर्फ़ Toll की नहीं रह जाती। पिछले पाँच साल में हाईवे सिस्टम ने चुपचाप अपना पूरा ढांचा बदल दिया है। 2021 में FASTag ने कैश की लाइन ख़त्म की। 2025 में Annual Pass ने बार-बार रिचार्ज कराने का झंझट ख़त्म किया। और अब, Local Pass का डिजिटलीकरण, काग़ज़ी कार्रवाई का वो आख़िरी हिस्सा हटा रहा है, जो अब तक बचा हुआ था। हर बार तरीक़ा एक ही रहा, DigiLocker, VAHAN और आपकी सहमति को जोड़कर, सरकार वो सबूत दोबारा नहीं मांगती जो वो पहले से जानती है। यही सोच UPI पेमेंट की दुनिया में लाया था। अब वही मॉडल Toll Gate से लेकर बाक़ी सरकारी दफ़्तरों तक, धीरे-धीरे फैल रहा है।

121 Toll Plaza से आगे: असली सवाल कब मिलेगा सबको फ़ायदा?

तो वापस चलते हैं उस बाइक सवार के पास, जो सुबह पौने नौ बजे उसी गेट से गुज़रा था। अगर वो उन 121 प्लाज़ों में से किसी एक के 20 किलोमीटर के दायरे में रहता, तो अब उसकी सुबह अलग होती। Toll Plaza के दफ़्तर के चक्कर नहीं, बस एक ऐप, एक बार की सहमति, और महीने भर की टेंशन ख़त्म। मगर अगर वो बाक़ी हज़ार से ज़्यादा Toll Plaza में से किसी एक के पास रहता है, तो उसकी सुबह अभी भी वैसी ही है, वही गेट, वही सवाल, कोई राहत नहीं। यही है असली तस्वीर, बदलाव आ चुका है, मगर अभी आधे रास्ते पर है, शायद असली सवाल ये नहीं कि सरकार ने क्या ठीक किया।

असली सवाल ये है, जब तक बाक़ी हज़ार Toll Plaza Digital नहीं होते, तब तक आपके शहर का Toll Gate आपके लिए हाईवे का दरवाज़ा है, या रोज़ की एक छोटी सी सज़ा। अगर आपके इलाक़े में भी कोई Toll Plaza है तो बताइए, आपका पास अभी डिजिटल हुआ, या अभी भी वही पुरानी लाइन बाक़ी है।

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